तमिलनाडु पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने 30 साल से फरार चल रहे मोस्ट वांटेड आतंकवादी अबूबकर सिद्दीकी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि वह फर्जी पहचान के साथ एक दक्षिणी राज्य में छिपा हुआ है। अबूबकर सिद्दीकी पर 90 के दशक में कई बम धमाकों, देश विरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों से जुड़े होने के आरोप हैं। लंबे समय से उसकी तलाश में लगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद उन पुराने मामलों की जांच फिर से तेज़ हो सकती है, जिनमें वह मुख्य साजिशकर्ता था। इस घटना से यह साफ हो गया है कि भले ही समय लग जाए, लेकिन देश के दुश्मनों को कानून के शिकंजे से बचना नामुमकिन है।
अबूबकर सिद्दीकी की गिरफ्तारी एक लंबे और सुनियोजित ऑपरेशन का नतीजा है। खुफिया एजेंसियों ने महीनों तक उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी और कई संदिग्ध स्थानों की गहन जांच की। तमिलनाडु पुलिस ने भी स्थानीय स्तर पर सहयोग करते हुए एक विशेष टीम बनाई, जिसने इस आतंकवादी की मौजूदगी की पुष्टि की। डिजिटल और फिजिकल खुफिया दोनों माध्यमों से मिली जानकारियों को मिलाकर एक ऑपरेशन अंजाम दिया गया, जिसमें अबूबकर को बिना किसी नुकसान के दबोच लिया गया।
अबूबकर सिद्दीकी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस गिरफ्तारी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। वह कई बार आतंकी हमलों की साजिश रच चुका है और उसके नेटवर्क ने पूरे दक्षिण भारत में आतंक फैलाने की कोशिश की थी। अब उसकी गिरफ्तारी से संबंधित संगठन और उसके साथी भी दबाव में आ सकते हैं, जिससे आतंकी गतिविधियों में कमी आ सकती है।
गिरफ्तारी के बाद तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने सुरक्षा बलों की सराहना की है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह साबित करता है कि आतंकवादियों को बचना मुश्किल है और समय के साथ उन्हें पकड़ना हमारी प्राथमिकता बनी रहेगी। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि अब सिद्दीकी से पूछताछ के बाद कई गुत्थियां सुलझेंगी और आतंकवाद के खिलाफ नयी रणनीतियां बनाई जाएंगी।



