
टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने हाल ही में H1-B वीजा प्रोग्राम का जोरदार समर्थन किया है। मस्क ने कहा कि अमेरिका के विकास और तकनीकी नवाचार में भारतीय पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका मानना है कि H1-B वीजा प्रणाली अमेरिका को दुनिया की प्रतिभाओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है और इससे देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहने में मदद मिलती है।
एलन मस्क ने विशेष रूप से भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी विशेषज्ञता और नवाचार की क्षमता अमेरिकी उद्योगों, खासकर तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अमूल्य योगदान देती है। मस्क के अनुसार, यदि यह वीजा प्रोग्राम कमजोर या समाप्त हो जाता है, तो अमेरिकी कंपनियों को कुशल और अनुभवी कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि H1-B वीजा के जरिए आने वाले भारतीय पेशेवर न केवल कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाते हैं, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करते हैं।
मस्क ने यह स्पष्ट किया कि तकनीकी उद्योगों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे समय में वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना अत्यंत आवश्यक है। H1-B वीजा के माध्यम से अमेरिका को वैश्विक तकनीकी और नवाचार में अग्रणी बने रहने में मदद मिलती है। उन्होंने नीति निर्धारकों से आग्रह किया कि वे इस प्रोग्राम को बनाए रखें और इसे और प्रभावी बनाएं ताकि अधिक कुशल पेशेवर अमेरिकी कंपनियों के साथ काम कर सकें।
भारतीय पेशेवरों ने पहले भी अमेरिका की टेक्नोलॉजी और विज्ञान की दुनिया में अपने योगदान से यह साबित किया है कि वे नवाचार और समाधान प्रदान करने में अग्रणी हैं। मस्क का यह बयान अमेरिकी उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के लिए भी एक संकेत है कि वैश्विक प्रतिभा को सीमित करना अमेरिका के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय विशेषज्ञों की मदद से अमेरिका नई तकनीकियों, अनुसंधान और विकास में दुनिया के मानचित्र पर हमेशा अग्रणी बना रहेगा।
इस तरह, एलन मस्क ने H1-B वीजा को केवल एक नौकरी प्रोग्राम नहीं बल्कि अमेरिका के तकनीकी और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। उनका यह समर्थन भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी तकनीकी उद्योग दोनों के लिए आशा और अवसर का संदेश है।



