अमेरिका के टेक्सस राज्य में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने पूरे क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया है। अब तक 120 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस भयावह आपदा के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने टेक्सस का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। वे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे, जहां राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं।
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह “अमेरिकी इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक” है। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया और राहत कार्यों की समीक्षा की। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित ह्यूस्टन, ऑस्टिन और सैन एंटोनियो के इलाकों में पानी का स्तर 10 फीट तक पहुंच चुका है। घर, अस्पताल, स्कूल और सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है।
मेलानिया ट्रंप ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए बनाए गए राहत शिविरों का दौरा किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि प्रशासन उनके पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समय एकजुट होकर काम करने का है, ताकि प्रभावित लोग जल्दी से सामान्य जीवन में लौट सकें।
मौसम विभाग के अनुसार, टेक्सस में भारी वर्षा और तूफानी हवाओं का दौर अभी थमा नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है। बाढ़ की वजह से राज्य के कई हिस्सों में बिजली, पानी और इंटरनेट सेवाएं ठप हो गई हैं। हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं और अस्थायी राहत कैंपों में रहने को मजबूर हैं।
संघीय और राज्य एजेंसियां, नेशनल गार्ड और रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं राहत कार्यों में जुटी हैं। हेलीकॉप्टर और बोट की मदद से फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है। अब तक लगभग 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
यह आपदा न केवल एक पर्यावरणीय चेतावनी है, बल्कि यह दिखाती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी और तत्काल राहत कितना जरूरी है। राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा से राहत कार्यों को नयी गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन सामने खड़ी चुनौती इतनी बड़ी है कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दीर्घकालिक योजना की भी जरूरत होगी।



