थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चला आ रहा ऐतिहासिक शिव मंदिर का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस बार यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के नेता मलेशिया में हो रही एक बहुपक्षीय बैठक के दौरान इस मुद्दे पर आम सहमति तक पहुंच सकते हैं। यह मंदिर, जिसे प्रेअ विहेयर (Preah Vihear Temple) के नाम से जाना जाता है, 11वीं सदी में बना एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर कंबोडिया की सीमा के पास एक पहाड़ी पर स्थित है, लेकिन थाईलैंड इस पर ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता रहा है।
यह विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने अपने फैसले में यह मंदिर कंबोडिया का हिस्सा बताया था, लेकिन आसपास की जमीन पर कब्ज़े को लेकर तनाव लगातार बना रहा। कई बार दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें भी हो चुकी हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है। इसके बाद भी यह मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक हल के बिना अधर में लटका रहा।
आज मलेशिया में हो रही ASEAN शिखर सम्मेलन के इतर थाईलैंड और कंबोडिया के प्रधानमंत्रियों की विशेष मुलाकात होने जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस बातचीत में शिव मंदिर विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में ठोस कदम उठ सकते हैं। दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि वे बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद बातचीत से सुलझ जाता है तो यह पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा। इससे न केवल द्विपक्षीय रिश्ते सुधरेंगे बल्कि सीमा पर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और स्थिरता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
कंबोडिया के प्रधानमंत्री ने बयान दिया है कि उनका देश “इतिहास और न्याय” के आधार पर शांति चाहता है, वहीं थाईलैंड की सरकार का कहना है कि वे “संप्रभुता की रक्षा” के साथ-साथ स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों पक्षों की यह नई सकारात्मक सोच उम्मीद जगा रही है कि यह लंबे समय से खिंचता आ रहा विवाद अब समाप्त हो सकता है।
अगर यह वार्ता सफल होती है, तो यह ASEAN की कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी, और भविष्य में अन्य सीमा विवादों के लिए भी यह एक मिसाल बन सकती है।



