
भारतीय नौसेना ने अपनी परिचालन और सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करते हुए बेड़े में तीन नए स्वदेशी जहाज शामिल किए हैं। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह उपलब्धि केवल नए जहाजों के शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आधुनिक जहाज निर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स के जुड़ने से नौसेना की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
नए स्वदेशी जहाज अत्याधुनिक तकनीकों और उन्नत प्रणालियों से लैस हैं। इनके निर्माण में भारतीय शिपयार्ड, इंजीनियरों और रक्षा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जहाजों में आधुनिक सेंसर, संचार प्रणाली और परिचालन उपकरण लगाए गए हैं, जो उन्हें विभिन्न समुद्री मिशनों के लिए अधिक सक्षम बनाते हैं। यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता का भी प्रतीक मानी जा रही है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित जहाजों और रक्षा उपकरणों का निर्माण न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा उद्योग की प्रतिष्ठा भी बढ़ाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकों का विकास बेहद महत्वपूर्ण है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन नए जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति और मजबूत होगी। साथ ही यह देश की जहाज निर्माण क्षमता और तकनीकी नवाचार को भी नई पहचान देगा। भारतीय नौसेना का लगातार आधुनिकीकरण भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



