पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इन दिनों अंदरूनी उथल-पुथल तेज़ होती दिख रही है। पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी और उनके भतीजे व पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं लंबे समय से चल रही थीं। अब खबरें आ रही हैं कि ममता बनर्जी ने पार्टी में व्यापक बदलाव की योजना बनाई थी, जिसकी रणनीति उन्होंने अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर तैयार की थी। लेकिन एक महज 12 मिनट की ऑनलाइन मीटिंग में ही यह रणनीति ध्वस्त हो गई।
इस कथित मीटिंग का मकसद था TMC के संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल करना, जिसमें कुछ पुराने और असंतुष्ट नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाना था, वहीं युवाओं को अधिक स्थान देना था। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी इस “बदलाव की स्क्रिप्ट” को एक सहज और सौम्य रूप देना चाहती थीं, ताकि किसी तरह की नाराजगी या बगावत की स्थिति न पैदा हो। लेकिन बैठक के दौरान जैसे ही उन्होंने प्रस्ताव रखना शुरू किया, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने आलोचना और आपत्ति दर्ज कर दी।
मीटिंग को लेकर सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह था कि यह मात्र 12 मिनट चली। सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए कि “क्या यह पार्टी अब केवल एक परिवार तक सिमट कर रह गई है?” साथ ही, निर्णय प्रक्रिया को एकतरफा और अलोकतांत्रिक बताकर नाराजगी जाहिर की। इसका नतीजा यह हुआ कि बैठक को बीच में ही समाप्त करना पड़ा और रणनीति पर काम विचलित हो गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक मीटिंग का विफल होना नहीं है, बल्कि TMC के भीतर सत्ताकेंद्रित संघर्ष और पीढ़ीगत बदलाव की खींचतान को उजागर करता है। एक तरफ ममता बनर्जी अब भी पार्टी की सर्वमान्य नेता हैं, वहीं दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी तेजी से एक स्वतंत्र और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरना चाह रहे हैं।
इस फेल हुई रणनीति के बाद पार्टी के अंदर और बाहर, दोनों जगह चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। क्या TMC में जल्द ही बड़े स्तर पर टूट देखने को मिलेगी? क्या ममता बनर्जी और अभिषेक के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं? या यह केवल मीडिया में बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई राजनीतिक रणनीति की असफलता है?
TMC ने इस मीटिंग पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पार्टी के अंदर अब नए सिरे से विचार-विमर्श का दौर शुरू हो चुका है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले TMC को अगर अपनी पकड़ बरकरार रखनी है, तो उसे आंतरिक मतभेदों को जल्द से जल्द सुलझाना होगा।



