बागेश्वर धाम सरकार के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद का केंद्र बने हैं एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, जिन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें “महिला तस्कर” कह दिया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया, और अब उस प्रोफेसर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। मामला धार्मिक भावनाएं आहत करने और मानहानि से जुड़ा है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए धीरेंद्र शास्त्री को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्हें “महिला तस्कर” कहे जाने के साथ-साथ उनके कार्यों पर भी सवाल उठाए गए थे। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और बागेश्वर धाम के अनुयायियों में गहरी नाराजगी फैल गई। इसके बाद कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और पुलिस में शिकायतें दर्ज की गईं।
धीरेंद्र शास्त्री के समर्थकों ने इसे “सुनियोजित साजिश” बताया है और कहा कि कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बागेश्वर धाम केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, और इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियाँ समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य करती हैं।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, प्रोफेसर के खिलाफ धारा 295A (धार्मिक भावनाएं आहत करना), 500 (मानहानि), और आईटी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। साथ ही, उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी निगरानी शुरू कर दी गई है ताकि यह देखा जा सके कि क्या पूर्व में भी उन्होंने इस तरह की कोई टिप्पणी की है।
दूसरी ओर, प्रोफेसर ने अपने बचाव में कहा है कि उनका बयान किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह एक वैचारिक बहस का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन अगर उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे खेद प्रकट करते हैं।
फिलहाल मामला तूल पकड़ता जा रहा है, और राजनीतिक संगठनों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, सभी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक आस्था का अपमान करार दे रहे हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और कानूनी प्रक्रिया क्या रुख अपनाती है।



