
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के आधिकारिक दौरे पर पहुंची हैं, जिसे भारत और यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत-ईयू के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त रक्षा उत्पादन और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत और यूरोपीय संघ के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही सप्लाई चेन को मजबूत करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में मिलकर काम करना चाहते हैं। इस संदर्भ में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी बातचीत अहम मानी जा रही है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उपकरणों का सह-निर्माण, आधुनिक तकनीक का आदान-प्रदान और साइबर व समुद्री सुरक्षा जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत यूरोपीय कंपनियों को निवेश के नए अवसर मिलने की संभावना है, जिससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, हरित ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह दौरा न केवल आर्थिक और रक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।



