
अमेरिका ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सीरिया में ISIS के ठिकानों पर बड़ा सैन्य अभियान चलाया है, जिसे ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ नाम दिया गया है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य सीरिया और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों, हथियार डिपो, ट्रेनिंग कैंप और कमांड सेंटर्स को नष्ट करना था। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, इस हमले को बेहद सटीक खुफिया जानकारी और आधुनिक निगरानी तकनीक के आधार पर अंजाम दिया गया, ताकि आतंकी गतिविधियों की जड़ पर प्रहार किया जा सके।
‘हॉकआई’ नाम का मतलब ही होता है बेहद पैनी नजर रखने वाला बाज़। इसी तरह इस ऑपरेशन में अमेरिका ने ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एडवांस सर्विलांस सिस्टम की मदद से ISIS के ठिकानों की पहचान की। इसके बाद लड़ाकू विमानों और मिसाइलों के जरिए एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई में ISIS के कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं और उनका संचार नेटवर्क भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में ISIS ने फिर से अपनी गतिविधियां बढ़ानी शुरू कर दी थीं। वे सीरिया और इराक के कुछ इलाकों में नए स्लीपर सेल बना रहे थे और हमलों की साजिश रच रहे थे। ऐसे में ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ को एक निवारक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि संगठन को दोबारा मजबूत होने से रोका जा सके।
इस हमले का असर सिर्फ सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी ISIS पर पड़ा है। उनके ठिकानों के तबाह होने से न केवल हथियार और संसाधन नष्ट हुए हैं, बल्कि लड़ाकों का मनोबल भी गिरा है। अमेरिका का मानना है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और आतंकवाद के खिलाफ चल रही अंतरराष्ट्रीय लड़ाई को नया बल मिलेगा।
हालांकि, इस ऑपरेशन के बाद पश्चिम एशिया में तनाव भी बढ़ा है। कुछ देशों और संगठनों ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि कई ने इसे आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ISIS भले ही पहले से कमजोर हो चुका हो, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए ऐसे अभियान भविष्य में भी जारी रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह वैश्विक स्तर पर आतंकवादी नेटवर्क को निशाना बनाकर उन्हें दोबारा संगठित होने से रोकना चाहता है। यह ऑपरेशन दिखाता है कि अमेरिका अभी भी ISIS को एक गंभीर खतरा मानता है और उसे जड़ से खत्म करने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है।



