चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी चिनफिंग जल्द ही रिटायर होने वाले हैं। यह पहली बार होगा जब शी चिनफिंग कम्युनिस्ट पार्टी को अपने अधिकार सौंपेंगे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने आगामी साल में नए राष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से चीन की राजनीति में नई हलचल आएगी और देश की विदेश नीति में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। शी चिनफिंग की विदाई के बाद नए नेता के चयन की प्रक्रिया अगले छह महीनों में पूरी होने की संभावना है, जिसके बाद चीन को नया राष्ट्रपति मिलेगा।
शी चिनफिंग का यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने 2018 में संविधान संशोधन के जरिए राष्ट्रपति पद की समयसीमा (टर्म लिमिट) खत्म कर दी थी, जिससे वे अनिश्चितकाल तक सत्ता में बने रह सकते थे। अब उनका अचानक से रिटायरमेंट का संकेत देना पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाला है। इससे चीन की आंतरिक राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक शी चिनफिंग ने पार्टी की स्थायी समिति को यह संकेत दे दिया है कि वे 2026 के भीतर– किसी भी समय– सत्ता हस्तांतरण के लिए तैयार हैं। हालांकि, चीन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन खुफिया रिपोर्ट्स और कूटनीतिक संकेत इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि शी चिनफिंग के हटने के बाद चीन की विदेश नीति में कुछ नरमी आ सकती है। अमेरिका, ताइवान, और भारत के साथ संबंधों को लेकर एक नया रुख अपनाया जा सकता है। साथ ही, आंतरिक रूप से आर्थिक सुधारों पर ज़ोर दिया जा सकता है, जो कोविड के बाद से चीन की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।



