फ्रांसीसी खुफिया एजेंसी की एक ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान चीन ने एक संगठित ‘डिसइन्फॉर्मेशन’ अभियान चलाया। इस अभियान के तहत चीन ने भारत के राफेल लड़ाकू विमानों की क्षमता और प्रदर्शन पर सवाल उठाए, ताकि भारत की सैन्य साख को कमजोर किया जा सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह अभियान सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से चलाया गया था, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। इस खुलासे के बाद भारत की रक्षा नीति और साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है।
फ्रांसीसी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन का यह डिसइन्फो अभियान केवल राफेल विमानों की क्षमता पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारत के सैन्य बलों की व्यापक छवि को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत और भ्रामक जानकारियां फैलाकर चीन ने भारत के भीतर और बाहर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस अभियान के तहत फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स, बॉट्स और ट्रोल्स का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए झूठी खबरें और अफवाहें फैलाई गईं। इसका मकसद भारत की रक्षा ताकतों पर जनता का विश्वास कम करना और पड़ोसी देशों के बीच तनाव को बढ़ावा देना था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान एक प्रकार का ‘सूचना युद्ध’ है, जो पारंपरिक युद्ध की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक होता जा रहा है। इस तरह की रणनीतियां न केवल सैन्य बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती हैं।
भारत सरकार और रक्षा विशेषज्ञ इस खुलासे को गंभीरता से ले रहे हैं और साइबर सुरक्षा में और अधिक कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, सूचना के सही और सटीक प्रसार के लिए जागरूकता अभियानों को भी तेज किया जाएगा।



