पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS की नीतियों का समर्थन करने वाले देशों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “जो देश BRICS की पॉलिसी को बढ़ावा देंगे, उन पर हम 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे।” ट्रंप ने अमेरिका के हितों को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए।
ट्रंप ने BRICS को “अमेरिकी आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देने वाला मंच” बताया और कहा कि यह संगठन डॉलर के विकल्प और चीन-रूस के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेताया कि जो देश इस गठबंधन का हिस्सा बनेंगे या इसका समर्थन करेंगे, उन्हें अमेरिकी बाजार में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय आई है जब कई विकासशील देश BRICS के तहत वैकल्पिक वित्तीय प्रणाली और व्यापार नेटवर्क की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील और साउथ अफ्रीका के इस समूह में हाल ही में कई नए देश भी शामिल हुए हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान से वैश्विक व्यापारिक रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर यदि वे दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने। यह नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ सिद्धांत को और ज्यादा आक्रामक रूप दे सकती है।
अब सबकी नजर आने वाले अमेरिकी चुनावों पर है, जहां ट्रंप की नीतियों का असर केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक समीकरणों पर भी पड़ेगा। BRICS समर्थक देश इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।



