क्या वाकई असरदार हैं डिटॉक्स ड्रिंक्स? डॉक्टरों ने बताए किडनी-लिवर से जुड़े खतरे

आजकल सोशल मीडिया पर डिटॉक्स ड्रिंक्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। नींबू-पानी, सेब का सिरका, हर्बल काढ़ा या तरह-तरह के पाउडर मिलाकर बनाए गए पेय को शरीर से “टॉक्सिन” निकालने का आसान तरीका बताया जाता है। दावा किया जाता है कि ये ड्रिंक्स वजन घटाने, त्वचा निखारने और पाचन सुधारने में मदद करती हैं। लेकिन क्या सच में शरीर को अलग से डिटॉक्स करने की जरूरत होती है? डॉक्टरों के अनुसार हमारा शरीर पहले से ही प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स सिस्टम से लैस है, जिसमें लिवर और किडनी मुख्य भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लिवर शरीर में मौजूद हानिकारक पदार्थों को तोड़कर बाहर निकालने का काम करता है, जबकि किडनी खून को फिल्टर करके यूरिन के जरिए अपशिष्ट बाहर करती है। ऐसे में सामान्य और संतुलित आहार लेने वाले व्यक्ति को अलग से डिटॉक्स ड्रिंक की आवश्यकता नहीं होती। कई बार अत्यधिक डिटॉक्स ड्रिंक लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है, जिससे कमजोरी, चक्कर और डिहाइड्रेशन की समस्या पैदा हो सकती है।
डॉक्टरों की मानें तो कुछ डिटॉक्स ड्रिंक्स में हाई मात्रा में ऑक्सलेट, हर्बल एक्सट्रैक्ट या अनियंत्रित सप्लीमेंट होते हैं, जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे पेय का सेवन करने से किडनी स्टोन या किडनी डैमेज का खतरा भी बढ़ सकता है। इसी तरह, बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल डिटॉक्स प्रोडक्ट लेने से लिवर एंजाइम बढ़ सकते हैं और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे सुरक्षित तरीका है—संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद। अगर आपको लिवर या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है तो खुद से प्रयोग करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। डिटॉक्स ड्रिंक को चमत्कारी उपाय मानने के बजाय वैज्ञानिक सोच अपनाएं, क्योंकि कई बार तेजी से फायदा पाने की कोशिश शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।



