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बॉर्डरलाइन शुगर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा

आजकल कई लोग अपनी हेल्थ रिपोर्ट देखकर यह कहकर संतुष्ट हो जाते हैं कि “अभी तो सिर्फ बॉर्डरलाइन शुगर है।” लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। बॉर्डरलाइन शुगर, जिसे प्री-डायबिटीज भी कहा जाता है, शरीर में उस स्थिति को दर्शाती है जब ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है लेकिन अभी डायबिटीज की श्रेणी में नहीं पहुंचा होता।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह धीरे-धीरे टाइप-2 डायबिटीज में बदल सकती है। इसके साथ ही दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। कई रिसर्च में यह सामने आया है कि जिन लोगों को प्री-डायबिटीज होती है, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।

बॉर्डरलाइन शुगर होने पर शरीर में इंसुलिन का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने के साथ-साथ रक्त वाहिकाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। समय के साथ यह स्थिति धमनियों को सख्त कर सकती है, जिससे दिल तक रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। यही कारण है कि कई बार लोगों को अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

डॉक्टरों के मुताबिक बॉर्डरलाइन शुगर को हल्के में लेने के बजाय इसे चेतावनी के संकेत के रूप में देखना चाहिए। अगर इस समय जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए तो डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव संभव है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और पर्याप्त नींद इस स्थिति को सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराना भी बेहद जरूरी है। डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि जिन लोगों की रिपोर्ट में बॉर्डरलाइन शुगर आती है, उन्हें साल में कम से कम दो बार जांच करानी चाहिए और अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर, फाइबर युक्त भोजन और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाना काफी फायदेमंद माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी बॉर्डरलाइन शुगर के मामलों को तेजी से बढ़ा रही है। ऐसे में जरूरी है कि लोग इसे छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। सही समय पर जागरूकता और सावधानी अपनाकर न केवल डायबिटीज बल्कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरे से भी खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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