Endometriosis और Diabetes: क्या इलाज से कम होगा डायबिटीज का खतरा?

महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक नई रिसर्च ने एंडोमेट्रियोसिस और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संभावित संबंध की ओर ध्यान खींचा है। एंडोमेट्रियोसिस को आमतौर पर पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, पेल्विक पेन और फर्टिलिटी से जुड़ी परेशानियों से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है।
एंडोमेट्रियोसिस एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं। इससे शरीर में लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है। यही लगातार रहने वाली इंफ्लेमेशन मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़े कुछ बदलावों में भूमिका निभा सकती है।
2026 में सामने आए एक अध्ययन में एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बिना एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं की तुलना में करीब 46 प्रतिशत अधिक पाया गया। हालांकि, यह एक संबंध है और इससे यह साबित नहीं होता कि एंडोमेट्रियोसिस सीधे तौर पर डायबिटीज का कारण बनता है।
दोनों स्थितियों के बीच कनेक्शन की एक संभावित वजह शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन हो सकती है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, इंसुलिन से जुड़ी प्रक्रियाएं और अन्य साझा जोखिम कारक भी इस संबंध में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिक अभी इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए अध्ययन कर रहे हैं।
सवाल यह है कि अगर एंडोमेट्रियोसिस का इलाज कराया जाए तो क्या डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाएगा? फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब नहीं है। उपलब्ध रिसर्च एंडोमेट्रियोसिस और डायबिटीज के बीच संबंध दिखाती है, लेकिन यह साबित नहीं करती कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज करने से भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज को रोका जा सकता है।
इसलिए एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं को केवल डायबिटीज के डर से अपनी बीमारी का इलाज नहीं चुनना चाहिए। एंडोमेट्रियोसिस का उपचार दर्द, बीमारी की गंभीरता, फर्टिलिटी और अन्य व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।
वहीं, जिन महिलाओं में डायबिटीज के दूसरे जोखिम कारक मौजूद हैं, उन्हें ब्लड शुगर की नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए। वजन, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और परिवार में डायबिटीज का इतिहास जैसे कारक भी टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों के लिए यह रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एंडोमेट्रियोसिस को लंबे समय तक केवल प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या मानने के बजाय पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति के रूप में समझने की जरूरत बढ़ रही है। हालांकि इस दिशा में अभी और बड़े तथा लंबे समय के अध्ययन जरूरी हैं।
एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। अगर पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग, लगातार पेल्विक दर्द या गर्भधारण में परेशानी हो रही है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और उचित उपचार से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर नई रिसर्च एंडोमेट्रियोसिस और टाइप-2 डायबिटीज के बीच एक महत्वपूर्ण कनेक्शन की ओर इशारा करती है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज कराने से डायबिटीज का खतरा कम हो जाएगा। महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेकर एंडोमेट्रियोसिस के साथ-साथ ब्लड शुगर और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए।



