नई रिसर्च का बड़ा खुलासा: डायबिटीज मरीजों में तेजी से बढ़ सकती हैं कैंसर कोशिकाएं

एक हालिया मेडिकल स्टडी ने डायबिटीज और कैंसर के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध को उजागर किया है, जिसने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। स्टडी में दावा किया गया है कि डायबिटीज के मरीजों के शरीर में कैंसर कोशिकाएं सामान्य मरीजों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं और उन्हें ज्यादा ऊर्जा मिलती है, जिसके कारण कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन में पाया गया कि हाई ब्लड शुगर लेवल कैंसर कोशिकाओं को अतिरिक्त ग्लूकोज उपलब्ध कराता है, जिससे वे तेजी से विकसित होकर फैल सकती हैं।
रिसर्चरों के अनुसार डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिसके कारण रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। यही अतिरिक्त शुगर कैंसर कोशिकाओं के लिए ईंधन की तरह काम करती है। कैंसर सेल सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक आक्रामक होती हैं और ऊर्जा की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में जब उन्हें शरीर में पहले से मौजूद उच्च शुगर मिलती है, तो वे तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसी कारण अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज के मरीजों में कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा अधिक पाया जाता है।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि इंसुलिन प्रतिरोध (इंसुलिन रेजिस्टेंस) भी कैंसर कोशिकाओं को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकता है। जब शरीर में इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा होने के बावजूद ग्लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, तो शरीर अधिक इंसुलिन बनाता है। यह अत्यधिक इंसुलिन कई बार ट्यूमर के बढ़ने में सहायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि कैंसर के खतरे को कम किया जा सके।
स्टडी में यह भी सुझाव दिया गया है कि डायबिटीज मरीजों को नियमित मेडिकल चेकअप कराते रहना चाहिए, विशेषकर अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है। स्वस्थ खान-पान, व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय-समय पर कैंसर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी कदम माने जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज और कैंसर का संबंध नया नहीं है, पर नई स्टडी ने इस बात को और मजबूत ढंग से साबित किया है कि दोनों स्थितियां एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह खोज डायबिटीज मरीजों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखें और शुगर नियंत्रण के साथ नियमित जांच कराते रहें, ताकि संभावित कैंसर जोखिम को समय रहते रोका जा सके।



