कोलेस्ट्रोल नॉर्मल फिर भी Heart Attack का खतरा? जानें जरूरी टेस्ट

अक्सर माना जाता है कि अगर कोलेस्ट्रोल रिपोर्ट सामान्य है तो हार्ट अटैक का खतरा भी नहीं होगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। हृदय रोग का जोखिम केवल LDL कोलेस्ट्रोल से तय नहीं होता। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास, उम्र और शरीर में मौजूद अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में Lipoprotein(a) यानी Lp(a) एक महत्वपूर्ण टेस्ट हो सकता है। 2026 की ACC/AHA गाइडलाइन में हर वयस्क के जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) मापने की सलाह दी गई है। इसका स्तर काफी हद तक आनुवंशिक होता है और सामान्य LDL के बावजूद ज्यादा Lp(a) हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है।
एक अन्य जांच Apolipoprotein B (ApoB) है। खासतौर पर डायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, कार्डियोमेटाबोलिक समस्याओं या पहले से हृदय रोग वाले कुछ लोगों में ApoB अतिरिक्त जोखिम की जानकारी देने में मदद कर सकता है, भले ही LDL-C लक्ष्य के भीतर हो।
डॉक्टर कुछ लोगों में Coronary Artery Calcium (CAC) स्कोर की सलाह भी दे सकते हैं। यह नॉन-कॉन्ट्रास्ट CT स्कैन के जरिए हृदय की धमनियों में कैल्शियमयुक्त प्लाक की मौजूदगी का आकलन करता है। 2026 की गाइडलाइन के मुताबिक इसका चयनित इस्तेमाल खासकर ऐसे पुरुषों और महिलाओं में किया जा सकता है जिनका अनुमानित हृदय जोखिम borderline या intermediate हो और उपचार का फैसला स्पष्ट न हो।
इसके अलावा परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी की बीमारी और कुछ अन्य स्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए केवल एक सामान्य कोलेस्ट्रोल रिपोर्ट देखकर हृदय को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।
हालांकि, हर व्यक्ति को ये सभी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। कौन-सी जांच उपयोगी होगी, यह उम्र, लक्षण, पारिवारिक इतिहास और कुल cardiovascular risk पर निर्भर करता है। सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना, कमजोरी या जबड़े/बांह में दर्द जैसे हार्ट अटैक के संकेत हों तो टेस्ट कराने के बजाय तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।



