टॉयलेट पेपर और टिशू पेपर सेहत के लिए कितने सुरक्षित? जानें छिपे केमिकल का सच

टॉयलेट पेपर और टिशू पेपर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन क्या इनमें मौजूद कुछ केमिकल शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं? वैज्ञानिक शोध में कुछ पेपर प्रोडक्ट्स में phthalates, polycyclic aromatic hydrocarbons (PAHs) और अन्य रासायनिक अवशेषों की मौजूदगी की जांच की गई है।
2019 में प्रकाशित एक अध्ययन में घाना के बाजार से लिए गए 32 टॉयलेट टिशू सैंपल की जांच की गई थी। शोधकर्ताओं को इनमें PAHs, phthalates और कुछ semi-volatile chlorinated organic compounds मिले। हालांकि, यह अध्ययन सीमित संख्या में नमूनों और एक विशेष बाजार पर आधारित था, इसलिए इसके निष्कर्षों को सभी देशों और सभी ब्रांडों के टॉयलेट पेपर पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
कुछ पेपर और पर्सनल-हाइजीन प्रोडक्ट्स में PFAS जैसे ‘forever chemicals’ को लेकर भी वैज्ञानिक रुचि बढ़ी है। शोध में कुछ पर्सनल हाइजीन उत्पादों में PFAS की मौजूदगी पाई गई है और इन रसायनों के लंबे समय तक संपर्क को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर लगातार अध्ययन हो रहे हैं।
PFAS के मामले में वैज्ञानिकों ने इनके संभावित प्रभावों में इम्यून सिस्टम, हार्मोनल/मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और कुछ कैंसर के जोखिम जैसे क्षेत्रों का अध्ययन किया है। हालांकि, किसी खास टिशू या टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल से सीधे बीमारी होने का निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं है।
इसलिए टॉयलेट पेपर या टिशू पेपर को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। इस्तेमाल के लिए बिना खुशबू वाले, त्वचा के लिए बने और भरोसेमंद ब्रांड के उत्पाद चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर किसी उत्पाद के इस्तेमाल से जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या बार-बार हो रही है, तो उसका इस्तेमाल बंद कर डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।



