किडनी रोग और प्रेग्नेंसी: थोड़ी-सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा, जानें डॉक्टर की अहम सलाह

किडनी से जुड़ी बीमारी से पीड़ित महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी एक संवेदनशील अवस्था होती है, जिसमें जरा-सी लापरवाही मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। डॉक्टरों के अनुसार किडनी शरीर का ऐसा अंग है जो खून को साफ करने, टॉक्सिन बाहर निकालने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने और हार्मोन संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे किडनी को सामान्य से अधिक काम करना पड़ता है। यदि महिला पहले से क्रॉनिक किडनी डिजीज, प्रोटीन यूरिया, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी फेल्योर जैसी समस्या से जूझ रही हो, तो प्रेग्नेंसी से पहले और दौरान विशेष सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि किडनी मरीज बिना नेफ्रोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट की संयुक्त सलाह के गर्भधारण का निर्णय न लें। प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित किडनी फंक्शन टेस्ट, ब्लड प्रेशर की निगरानी, यूरिन जांच और अल्ट्रासाउंड बेहद जरूरी होते हैं। कई बार लापरवाही के कारण प्रीक्लेम्पसिया, समय से पहले डिलीवरी, बच्चे का कम वजन या मां में किडनी की स्थिति बिगड़ने जैसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं। खानपान को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है। नमक और प्रोटीन का सेवन डॉक्टर की सलाह अनुसार सीमित मात्रा में करना चाहिए और बिना पूछे कोई दवा या आयुर्वेदिक सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं किडनी और भ्रूण दोनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा पर्याप्त आराम, तनाव से दूरी और हल्की शारीरिक गतिविधि भी फायदेमंद मानी जाती है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि डायलिसिस पर चल रही महिलाओं में भी प्रेग्नेंसी संभव है, लेकिन इसके लिए अधिक बार डायलिसिस और कड़ी मेडिकल निगरानी जरूरी होती है। कुल मिलाकर किडनी की बीमारी में गर्भावस्था असंभव नहीं है, लेकिन इसे सुरक्षित बनाने के लिए जागरूकता, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का सख्ती से पालन करना ही मां और बच्चे के स्वस्थ भविष्य की कुंजी है।



