सोते समय गिरने जैसा एहसास क्यों होता है? डॉक्टर ने बताया इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

रात को चैन की नींद लेते-लेते अचानक ऐसा महसूस होना कि जैसे हम ऊंचाई से गिर रहे हों और झटके के साथ नींद खुल जाए—यह अनुभव बहुत-से लोगों को होता है। कई बार इसके साथ दिल की धड़कन तेज हो जाती है और कुछ सेकंड तक डर भी लगता है। आम भाषा में लोग इसे “नींद में झटका लगना” या “गिरने का एहसास” कहते हैं। मेडिकल साइंस में इसे हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) या स्लीप स्टार्ट कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यह एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है और ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती।
जब हमारा शरीर जागने की अवस्था से नींद की ओर जाता है, तब दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल पूरी तरह सेट नहीं हो पाता। नींद के शुरुआती चरण में मांसपेशियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं और शरीर का तापमान व हार्ट रेट भी कम होता है। इसी दौरान दिमाग को कभी-कभी यह गलत संकेत मिल जाता है कि शरीर नियंत्रण खो रहा है या गिर रहा है। जवाब में दिमाग मांसपेशियों को अचानक सिकुड़ने का सिग्नल भेज देता है, जिससे तेज झटका लगता है और गिरने जैसा एहसास होता है।
डॉक्टर बताते हैं कि तनाव, चिंता, ज्यादा कैफीन का सेवन, नींद की कमी और अनियमित लाइफस्टाइल इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता, जिससे हाइपनिक जर्क की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा बहुत थकावट के बाद या गलत पोजिशन में सोने से भी ऐसा हो सकता है।
हालांकि यह स्थिति सामान्य है, लेकिन अगर यह हर रात बार-बार हो, नींद पूरी न होने लगे या इसके साथ सीने में दर्द, सांस की परेशानी या अत्यधिक घबराहट महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बेहतर नींद के लिए सोने से पहले कैफीन से दूरी, स्क्रीन टाइम कम करना, हल्की एक्सरसाइज और नियमित स्लीप रूटीन अपनाना फायदेमंद होता है। सही आदतों के साथ यह गिरने का एहसास धीरे-धीरे अपने आप कम हो जाता है।



