त्वचा रोग सोरायसिस बढ़ा रहा मानसिक तनाव, हर चौथा मरीज डिप्रेशन की चपेट में

त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारियों में शामिल Psoriasis केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है। हाल ही में सामने आए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित लगभग 25 प्रतिशत मरीज किसी न किसी रूप में Depression का सामना करते हैं। यह बीमारी त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और सूजन जैसी समस्याएं पैदा करती है, जिससे मरीजों का आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है और धीरे-धीरे मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोरायसिस एक क्रॉनिक यानी लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिसका सीधा संबंध शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से होता है। जब शरीर की Immune System असंतुलित हो जाती है, तो त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से कई गुना तेजी से बनने लगती हैं। इसके कारण त्वचा पर मोटी परत, लाल धब्बे और जलन जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है।
डॉक्टरों के अनुसार सोरायसिस से पीड़ित मरीज अक्सर समाज में झिझक महसूस करते हैं। कई लोग त्वचा पर दिखाई देने वाले धब्बों के कारण सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचते हैं या लोगों के सामने असहज महसूस करते हैं। यही स्थिति धीरे-धीरे मानसिक दबाव, चिंता और डिप्रेशन का कारण बन सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बीमारी में केवल त्वचा का इलाज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।
सोरायसिस का प्रभाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी पड़ता है, जिससे अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीजों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव से दूर रहने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना भी जरूरी होता है, ताकि बीमारी को नियंत्रित किया जा सके और उसके दुष्प्रभावों से बचा जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोरायसिस के मरीजों को समय पर सही इलाज, परामर्श और मानसिक सहयोग मिल जाए तो वे सामान्य जीवन जी सकते हैं। जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है, ताकि लोग इस बीमारी को लेकर गलत धारणाओं से बचें और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करें।



