7वें महीने में डिलीवरी से नवजात गंभीर

एक गंभीर मेडिकल मामले में 7वें महीने में ही प्रसव (preterm delivery) कराना पड़ा, जिसके बाद नवजात की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति महिला की जिद और समय पर चिकित्सा सलाह न मानने के कारण और गंभीर हो गई।
डॉक्टरों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान कुछ स्थितियों में मरीज को पूरी तरह आराम और विशेषज्ञों की निगरानी की जरूरत होती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला चिकित्सकीय सलाह को नजरअंदाज करती है या जोखिम भरे फैसले लेती है, तो इसका सीधा असर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।
7वें महीने में डिलीवरी को प्रीमैच्योर बर्थ माना जाता है, जिसमें बच्चे के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते। इसी वजह से ऐसे नवजातों को अक्सर आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।
विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से अपील की है कि किसी भी तरह की परेशानी या असुविधा होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और बिना चिकित्सकीय अनुमति के कोई भी जोखिम भरा निर्णय न लें। समय पर देखभाल से कई गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।



