सेम डाइट, फिर भी कम रिजल्ट? जानें क्यों महिलाओं के लिए वजन घटाना होता है ज्यादा मुश्किल

अक्सर देखा जाता है कि एक ही घर में पति-पत्नी या भाई-बहन अगर एक जैसी डाइट और वर्कआउट फॉलो करें, तो पुरुषों का वजन तेजी से घटने लगता है, जबकि महिलाओं को अपेक्षाकृत कम या धीमा रिजल्ट मिलता है। यह स्थिति कई महिलाओं को निराश करती है और उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत बेकार जा रही है। लेकिन सच यह है कि इसके पीछे मजबूत बायोलॉजिकल और हार्मोनल कारण होते हैं, न कि सिर्फ डाइट या अनुशासन की कमी।
महिलाओं के शरीर की संरचना पुरुषों से अलग होती है। आमतौर पर महिलाओं में बॉडी फैट प्रतिशत स्वाभाविक रूप से अधिक होता है, क्योंकि शरीर प्रजनन और हार्मोनल जरूरतों को ध्यान में रखकर ऊर्जा स्टोर करता है। इसके अलावा पुरुषों में मसल मास ज्यादा होता है और मसल्स ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं। यही वजह है कि समान खाना खाने और एक जैसा व्यायाम करने के बावजूद पुरुषों का मेटाबॉलिज्म अक्सर तेज रहता है।
हार्मोन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन वजन घटाने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। पीरियड्स साइकिल, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज या थायरॉयड जैसी स्थितियां शरीर के फैट स्टोरेज और भूख को बदल सकती हैं। कई बार वॉटर रिटेंशन की वजह से वजन मशीन पर कम फर्क दिखता है, जबकि शरीर के अंदर सकारात्मक बदलाव हो रहे होते हैं।
तनाव और नींद की कमी भी महिलाओं के वेट लॉस को प्रभावित कर सकती है। कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने पर शरीर फैट को बचाकर रखने लगता है। साथ ही घर और काम की दोहरी जिम्मेदारी के कारण महिलाओं को अक्सर पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, जिससे वजन घटाने की रफ्तार धीमी हो जाती है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि महिलाओं का वजन कम नहीं हो सकता। सही स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित कार्बोहाइड्रेट, अच्छी नींद और हार्मोनल हेल्थ पर ध्यान देकर बेहतर रिजल्ट पाए जा सकते हैं। जरूरी है कि तुलना करने के बजाय अपने शरीर की जरूरतों को समझा जाए और धैर्य रखा जाए। धीमी लेकिन स्थायी प्रगति ही लंबे समय में सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होती है।



