शुगरी ड्रिंक्स टीनएजर्स में बढ़ा रही हैं घबराहट और एंग्जायटी, 34% तक जोखिम

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि टीनएजर्स में शुगरयुक्त ड्रिंक्स के सेवन से मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स और अन्य मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन किशोरों में घबराहट और बेचैनी (एंग्जायटी) की समस्या को बढ़ा रहा है। शोध में यह पाया गया है कि जिन टीनएजर्स द्वारा नियमित रूप से शुगर ड्रिंक्स का सेवन किया जाता है, उनमें सामान्य से लगभग 34% अधिक एंग्जायटी का खतरा होता है।
शरीर में अत्यधिक शुगर का सेवन रक्त शर्करा में तेजी से उतार-चढ़ाव पैदा करता है, जो मस्तिष्क में तनाव हार्मोन को प्रभावित करता है। इससे टीनएजर्स अक्सर अत्यधिक तंत्रिकीय दबाव, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्याओं का सामना करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरों में एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याएं पहले से कहीं अधिक बढ़ रही हैं, और इसका एक मुख्य कारण शुगरयुक्त पेय पदार्थ बन सकते हैं।
इसके अलावा, शुगर ड्रिंक्स की अधिकता न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि यह मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी शारीरिक समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाती है। किशोर अक्सर स्कूल या दोस्तों के बीच इन पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, और यह आदत धीरे-धीरे उनके जीवनशैली में स्थायी रूप से शामिल हो जाती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टीनएजर्स को मीठे पेय पदार्थों के बजाय पानी, प्राकृतिक जूस और हर्बल चाय का सेवन करना चाहिए। माता-पिता और शिक्षकों को भी बच्चों की डायट पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें शुगर ड्रिंक्स की बढ़ती खपत के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना चाहिए। छोटे-छोटे बदलाव जैसे कि पेय पदार्थों में शुगर की मात्रा कम करना, स्नैक्स में प्राकृतिक विकल्प शामिल करना, और नियमित व्यायाम को प्रोत्साहित करना, किशोरों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद कर सकते हैं।



