डायबिटीज मरीजों के लिए चेतावनी: फिजिकल एक्टिविटी की कमी से बढ़ता है हार्ट फेलियर का खतरा

डायबिटीज आज केवल ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं मानी जाती, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली गंभीर स्थिति है। हाल ही में American Heart Association से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक बड़ी स्टडी में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। करीब 23 लाख लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों के विश्लेषण के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि जिन डायबिटीज मरीजों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम होती है, उनमें हार्ट फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह शोध बताता है कि केवल दवा या इंसुलिन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजाना की एक्टिव लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर पर्याप्त रूप से एक्टिव नहीं रहता, तो दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। समय के साथ यह दबाव दिल की मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है। खासतौर पर टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं पहले से मौजूद रहती हैं, जो हार्ट फेलियर के जोखिम को और बढ़ा देती हैं। ऐसे में नियमित वॉक, हल्की दौड़, साइकिलिंग या योग जैसी गतिविधियां दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि जो लोग हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की एक्सरसाइज करते हैं, उनमें दिल से जुड़ी जटिलताओं की संभावना काफी कम हो जाती है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों को हर आधे घंटे में थोड़ा चलना-फिरना चाहिए। छोटी-छोटी आदतें, जैसे सीढ़ियां चढ़ना या पास की दूरी पैदल तय करना, भविष्य में बड़े स्वास्थ्य लाभ दे सकती हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डायबिटीज मैनेजमेंट का फॉर्मूला अब बदल चुका है। दवाइयों के साथ संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और नियमित शारीरिक गतिविधि—ये तीनों मिलकर ही दिल को सुरक्षित रख सकते हैं। अगर समय रहते लोग अपनी जीवनशैली में सुधार कर लें, तो हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से काफी हद तक बचाव संभव है।



