
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि बेटियों का उज्ज्वल भविष्य देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में बेटियों को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक राष्ट्र की प्रगति अधूरी रहेगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि हर बेटी को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले और वह आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाए। प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन है, जिसने देशभर में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। इसके तहत बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिला है, लिंग अनुपात में सुधार हुआ है और लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। पीएम मोदी ने कहा कि आज सरकार छात्रवृत्ति, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप सपोर्ट और डिजिटल शिक्षा जैसे माध्यमों से बेटियों को सशक्त बना रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, आयुष्मान भारत और मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाओं से महिलाओं और बेटियों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री ने समाज से आह्वान किया कि बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र की ताकत समझा जाए। उन्होंने कहा कि जब बेटियां आगे बढ़ती हैं तो केवल परिवार ही नहीं, पूरा समाज और देश प्रगति करता है। पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस दें। अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारतीय बेटियां वैश्विक मंच पर देश का नेतृत्व करेंगी और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अहम योगदान देंगी।



