
चेन्नई के लिए दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट की योजना में बड़ा बदलाव हुआ है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में घोषणा की कि परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक जगह तलाशने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक परंदूर प्रोजेक्ट से कृषि भूमि और किसानों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका थी। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इस परियोजना का विरोध भी किया जा रहा था। सरकार का कहना है कि नए एयरपोर्ट के लिए ऐसी जगह चुनी जाएगी, जहां किसानों और रिहायशी इलाकों का विस्थापन कम से कम हो।
हालांकि परंदूर प्रोजेक्ट रद होने के बावजूद चेन्नई को नए एयरपोर्ट की जरूरत खत्म नहीं हुई है। मौजूदा चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों और कार्गो यातायात का दबाव बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने इसी बढ़ती मांग को देखते हुए वैकल्पिक स्थान पर नया एयरपोर्ट विकसित करने की योजना जारी रखने का फैसला किया है।
सरकार अब संभावित नई जगहों का तकनीकी और व्यवहारिक अध्ययन करेगी। एयरपोर्ट की लोकेशन तय करते समय जमीन की उपलब्धता, यातायात कनेक्टिविटी, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले असर जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
चेन्नई के मौजूदा एयरपोर्ट का विस्तार भी किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने के लिए नए टर्मिनल और अन्य सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। इससे नया एयरपोर्ट तैयार होने तक बढ़ते हवाई यातायात को संभालने में मदद मिल सकती है।
नया एयरपोर्ट चेन्नई के बढ़ते औद्योगिक और कारोबारी महत्व के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। चेन्नई और आसपास का क्षेत्र ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। बेहतर एयर कनेक्टिविटी से उद्योगों, निवेश और कार्गो परिवहन को फायदा मिलने की उम्मीद है।
परंदूर परियोजना को लेकर सरकार के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्ष ने प्रोजेक्ट रद किए जाने से राज्य के विकास और निवेश पर असर पड़ने की आशंका जताई है। वहीं सरकार का जोर किसानों की जमीन और स्थानीय लोगों की आजीविका की सुरक्षा पर है।
कुल मिलाकर परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के रद होने के बाद चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसकी लोकेशन बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई है। अब सरकार के सामने ऐसी जगह तलाशने की चुनौती है, जहां चेन्नई की भविष्य की विमानन जरूरतें पूरी हों और किसानों व स्थानीय आबादी पर असर भी न्यूनतम रहे।



