देशबड़ी खबर

नेपाल बाढ़ की ISRO ने खोली वजह, सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया ग्लेशियर का राज

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। अब ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर इस आपदा के संभावित कारणों की तस्वीर साफ की है। शुरुआती आकलन में हिमालय के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए आइस-रॉक एवलॉन्च को बाढ़ की प्रमुख वजह माना गया है।

NRSC ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना की। इसमें ग्लेशियर के आसपास के इलाके में बड़े पैमाने पर बदलाव दिखाई दिए। वैज्ञानिकों ने 24 अगस्त की Sentinel-2 तस्वीरों और 26 अगस्त की Resourcesat-2A तस्वीरों समेत अलग-अलग समय की इमेज का अध्ययन कर भू-भाग में हुए बदलावों का आकलन किया।

प्रारंभिक निष्कर्ष के मुताबिक, ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा और अपने साथ बर्फ, चट्टान, मिट्टी तथा मलबे की बड़ी मात्रा लेकर आया। इस घटना ने पहाड़ी नदी के प्रवाह को अचानक प्रभावित किया। इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा, जिससे रास्ते में आने वाले इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

शुरुआत में इस घटना को भूकंप से जोड़कर देखा गया था। भारत के निगरानी नेटवर्क ने क्षेत्र में 4.9 तीव्रता की भूकंपीय गतिविधि दर्ज की थी। हालांकि, बाद के विश्लेषण में यह सवाल उठा कि दर्ज हुई कंपन वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव से पैदा हुई थीं या किसी भूकंप से। इसलिए भूकंप को सीधे बाढ़ का कारण मानना अभी सावधानी से देखने की जरूरत है।

सैटेलाइट तस्वीरों की खासियत यह रही कि इनके जरिए आपदा से पहले और बाद के भू-दृश्य में आया बदलाव देखा जा सका। कई हिस्सों में जहां पहले बर्फ और पहाड़ी भूभाग दिखाई देता था, वहां बाद की तस्वीरों में मलबे और बदली हुई नदी की धारा नजर आई। इससे वैज्ञानिकों को घटना के संभावित स्रोत तक पहुंचने में मदद मिली।

इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली की जरूरत को भी उजागर किया है। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता को लेकर वैज्ञानिक लगातार चिंता जताते रहे हैं। हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

नेपाल की इस आपदा का असर केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। तेज पानी और मलबे के बहाव ने नदियों के साथ नीचे की ओर बसे इलाकों और बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित किया। यही कारण है कि भारत और नेपाल दोनों के लिए हिमालयी नदियों तथा ग्लेशियरों की रियल-टाइम निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

कुल मिलाकर, ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों ने नेपाल की अचानक आई बाढ़ के पीछे ग्लेशियर ढहने और बड़े पैमाने पर बर्फ-चट्टान-मलबे के बहाव की अहम भूमिका का संकेत दिया है। हालांकि कारणों की अंतिम वैज्ञानिक पुष्टि के लिए आगे का अध्ययन जरूरी है, लेकिन यह घटना हिमालय में बढ़ते ग्लेशियर जोखिम की गंभीर चेतावनी जरूर देती है।

Computer Jagat 24

Founded in 2018, Computer Jagat24 has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Back to top button