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नेपाल बाढ़ में ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य लापता, कोलकाता का 32 सदस्यीय समूह भी संपर्क से बाहर

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे समूह का हिस्सा बताए जा रहे हैं और नेपाल-तिब्बत सीमा के पास प्रभावित क्षेत्र में थे। 

ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया है कि उसके 77 सदस्य एक इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे, जिसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। फाउंडेशन के मुताबिक, नेपाल में मौजूद उसके 495 अन्य सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं। 

इसी बीच कोलकाता का 32 सदस्यीय दल भी संपर्क से बाहर है। इस समूह में 30 यात्री और दो टूर मैनेजर शामिल बताए गए हैं। समूह 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और 22 अगस्त को नेपाल पहुंचा था। बुधवार सुबह यह दल तिब्बत में प्रवेश के लिए रसुवागढ़ी इलाके में पहुंचा था, तभी अचानक बाढ़ आ गई।

बताया गया है कि बाढ़ आने के बाद से समूह के किसी भी सदस्य से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। परिवारों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आपदा के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

नेपाल के रसुवा जिले में आई बाढ़ ने सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

इस आपदा में भारतीय नागरिकों के लापता होने की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 133 से अधिक भारतीयों के लापता होने की बात कही गई, जबकि बाद में नेपाल के विदेश मंत्री ने करीब 300 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी। आंकड़ों का सत्यापन अभी जारी है।

भारत सरकार और भारतीय दूतावास नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारतीय नागरिकों की जानकारी और सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन भी सक्रिय की गई है। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने के साथ बचाव एवं राहत प्रयासों में सहयोग का भरोसा दिया है।

कुल मिलाकर, नेपाल की भीषण बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों और कोलकाता के 32 सदस्यीय समूह से संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई है, जबकि राहत-बचाव अभियान जारी है।

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