नेपाल में फिर वही तबाही, 14 महीने में दूसरी बार आई विनाशकारी बाढ़

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर पुराने जख्म ताजा कर दिए हैं। 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने रासुवा जिले के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई, जिससे सड़कें, पुल, घर और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ। यह घटना इसलिए भी चिंता बढ़ा रही है क्योंकि करीब 14 महीने के भीतर इसी नदी क्षेत्र में दूसरी बड़ी बाढ़ की घटना सामने आई है।
दोनों घटनाओं में एक समान पैटर्न नजर आता है—पहाड़ी क्षेत्र में अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबे का नीचे की ओर आना और कुछ ही समय में नदी का बेहद उग्र रूप ले लेना। इस बार भी बाढ़ ने लोगों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया और कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद बाढ़ का पानी आगे त्रिशूली नदी की ओर भी पहुंचा। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट गए और पुलों को नुकसान पहुंचा। चीन-नेपाल सीमा के पास स्थित महत्वपूर्ण व्यापारिक और परिवहन मार्ग भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
इस आपदा के पीछे शुरुआती तौर पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने से बने मलबे के नदी में गिरने जैसी वजहों की जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में ग्लेशियल गतिविधि, भूस्खलन और नदी में अचानक अवरोध बनने को भी संभावित कारण बताया गया है। इसलिए बाढ़ के सटीक कारण को लेकर जांच अभी जारी है।
पिछली घटना की याद इसलिए भी ताजा हो गई है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं लगातार चिंता का विषय बन रही हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक नेपाल में अत्यधिक बाढ़ की घटनाएं खासकर मानसून के दौरान अधिक देखने को मिलती हैं।
इस बार की बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर ने हालात को और गंभीर बना दिया है। राहत और बचाव दल मलबे और तेज बहाव के बीच लोगों की तलाश में जुटे हैं। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़क संपर्क के कारण बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ी चिंता भविष्य में ऐसी घटनाओं की पूर्व चेतावनी को लेकर है। पहाड़ों में अचानक होने वाले भूस्खलन, ग्लेशियर टूटने या नदी में मलबे के कारण कुछ ही मिनटों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। ऐसे में नदी किनारे बसे इलाकों में मजबूत निगरानी और समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।
भारत के लिए भी यह घटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली कई नदियां उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रवेश करती हैं। नेपाल में अचानक बढ़ा जलप्रवाह निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा सकता है, जिसके चलते दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
कुल मिलाकर, 14 महीने के भीतर एक ही क्षेत्र में दो बड़ी बाढ़ की घटनाओं ने हिमालयी आपदाओं के बदलते स्वरूप पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेपाल की मौजूदा त्रासदी एक बार फिर बताती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी, मजबूत बुनियादी ढांचा और तेज राहत-बचाव व्यवस्था कितनी जरूरी है।



