इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 31 नए प्लांट, 9000 नौकरियों का रास्ता साफ

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में कुल करीब 7,877 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करना है। मोबाइल फोन, टेलीकॉम उपकरण, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में कंपोनेंट की मांग लगातार बढ़ रही है। घरेलू स्तर पर इनका उत्पादन बढ़ने से कंपनियों को स्थानीय सप्लायर्स का मजबूत नेटवर्क मिल सकता है।
इन नए प्रोजेक्ट्स से हजारों प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार पहले से ही ECMS के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार को बढ़ावा दे रही है। मार्च 2026 तक योजना के तहत 75 परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने और करीब 61,000 करोड़ रुपये के निवेश से लगभग 65,000 प्रत्यक्ष नौकरियों की संभावना बताई गई थी।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट सेक्टर में निवेश बढ़ने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर भी मजबूती मिल सकती है। सरकार का जोर केवल तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने पर नहीं, बल्कि उनके लिए जरूरी कंपोनेंट, सब-असेंबली और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों का उत्पादन देश में करने पर है। इससे घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सरकार की व्यापक योजना भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की है। ECMS के तहत सरकार ने बड़े निवेश को आकर्षित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। आधिकारिक योजना के अनुसार इससे लंबे समय में 59,350 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने, 4.56 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और 91,600 अतिरिक्त प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की परिकल्पना की गई है।
इस योजना से मोबाइल और आईटी हार्डवेयर के अलावा ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम जैसे उद्योगों को भी फायदा मिल सकता है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट की स्थानीय उपलब्धता बढ़ने से कंपनियों को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे सप्लाई चेन में समय और लागत दोनों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
भारत पहले ही मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब सरकार का अगला फोकस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर है, ताकि उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन देश के भीतर विकसित हो सके। सरकार के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बीते वर्षों में उत्पादन और रोजगार दोनों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
31 नए प्रस्तावों की मंजूरी को इसी रणनीति की अगली कड़ी माना जा रहा है। नए प्लांट स्थापित होने के साथ प्रत्यक्ष नौकरियों के अलावा सप्लायर, लॉजिस्टिक्स, सर्विस और अन्य सहायक क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े औद्योगिक क्लस्टरों को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर सरकार का नया प्लान इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 31 प्रस्तावों में होने वाला निवेश, नए प्लांट और रोजगार के अवसर आने वाले वर्षों में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को और मजबूत कर सकते हैं। अब इन परियोजनाओं को तय समय में जमीन पर उतारना सरकार और कंपनियों के सामने अहम चुनौती होगी।



