सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वैवाहिक विवादों में बच्चों को मोहरा बनाना गलत

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि बच्चों को पति-पत्नी के आपसी विवाद में मोहरा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने झूठे POCSO मामले को रद्द करते हुए कहा कि कानूनों का इस्तेमाल न्याय के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत विवादों को बढ़ाने के लिए।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और सावधानी बेहद जरूरी है। POCSO जैसे कड़े कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनके दुरुपयोग से निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंच सकता है और कानून की गंभीरता प्रभावित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां पारिवारिक विवाद कानूनी लड़ाई में बदल जाते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा और उनके भविष्य को किसी भी विवाद से ऊपर रखा जाना चाहिए।
यह फैसला न्याय व्यवस्था में संतुलन की आवश्यकता को भी दर्शाता है—जहां बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे, वहीं कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष और जिम्मेदारी के साथ किया जाए।



