
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जिलों के खेतों में अचानक ओलावृष्टि हुई, जिससे खेतों में सफेद चादर जैसी स्थिति बन गई और गेहूं, सरसों और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। किसानों का कहना है कि कई दिनों की मेहनत एक ही दिन में बर्बाद हो गई।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी अलर्ट जारी किया है और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और राहत कार्य शुरू करने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में बीमा और सुरक्षित खेती के उपायों की अहमियत और बढ़ जाती है।
किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसलों के साथ-साथ कई खेतों में सिंचाई और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। इससे आने वाले मौसम में फसल की पैदावार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सरकारी अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में कृषि वैज्ञानिकों की टीम भेजकर फसलों के नुकसान का मुआवजा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे तुरंत फसल बचाव के उपाय अपनाएं और बीमा दावा प्रक्रिया को तेज करें। इस संकट ने किसानों के लिए आर्थिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।



