धान की खेती से बढ़ रहा ग्लोबल वार्मिंग का खतरा, रिसर्च में बड़ा दावा

एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि धान की खेती से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, धान के खेतों में पानी भरा रहने की स्थिति में मीथेन गैस का उत्सर्जन अधिक होता है, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस मानी जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे धान की खेती का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे मीथेन उत्सर्जन में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिसका सीधा असर धरती के तापमान पर पड़ सकता है। इससे जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेती के तरीकों में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके लिए वैकल्पिक खेती और जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।
हालांकि, कृषि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि धान दुनिया की एक प्रमुख खाद्य फसल है, इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे उत्पादन भी बना रहे और पर्यावरण पर असर भी कम हो।



