‘एक साल तक सोना न खरीदें’! ईरान युद्ध के बीच क्या है PM मोदी का मास्टरप्लान?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी बीच ‘एक साल तक सोना न खरीदें’ जैसी चर्चाओं ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। माना जा रहा है कि सरकार आयात बिल कम करने, विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित रखने और घरेलू निवेश को दूसरे क्षेत्रों की ओर मोड़ने की रणनीति पर काम कर सकती है। हालांकि सरकार की ओर से इस तरह का कोई आधिकारिक निर्देश सामने नहीं आया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में सोने की कीमतें काफी संवेदनशील बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ रहा है। जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आ जाती है। भारत जैसे देश, जहां बड़ी मात्रा में सोने का आयात होता है, वहां बढ़ती कीमतें व्यापार घाटे और महंगाई पर भी असर डाल सकती हैं।
इसी वजह से यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार लोगों को फिलहाल सोने में निवेश से बचने और अन्य वित्तीय विकल्पों की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकती है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर सोने का आयात लगातार बढ़ता रहा तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि आम लोग भी बढ़ती कीमतों के बीच खरीदारी को लेकर असमंजस में नजर आ रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और सरकार की संभावित आर्थिक रणनीतियों पर टिकी हुई हैं।



