


पंजाब सरकार द्वारा पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की Z+ सुरक्षा वापस लेने के फैसले के बाद मामला गरमा गया है। हालांकि, इस निर्णय के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराते हुए स्थिति को संतुलित करने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा में बदलाव राज्य स्तर पर किए गए आकलन के आधार पर किया गया था, लेकिन केंद्र ने संभावित जोखिमों को देखते हुए त्वरित कदम उठाया। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि वीआईपी सुरक्षा को लेकर राज्य और केंद्र के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं।
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, जहां विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।