
पासपोर्ट जारी करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि नागरिकता से जुड़ी जांच प्रक्रिया (SIR) को पूरा होने में बहुत लंबा समय लगेगा, तो पहले यह तय करना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं। कोर्ट ने मामले में प्रशासनिक देरी पर सवाल उठाते हुए स्पष्टता की जरूरत बताई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता का सवाल लंबे समय तक लंबित नहीं रह सकता, क्योंकि इसका सीधा असर पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि अगर किसी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं, तो नागरिकता की स्थिति पहले स्पष्ट की जानी चाहिए।
मामला पासपोर्ट जारी करने से जुड़ा है, जहां आवेदक की नागरिकता को लेकर सवाल उठे थे। पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है, जिसके लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि ऐसे मामलों में अनिश्चितता लंबे समय तक बनी न रहे। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
SIR (Special Intensive Revision/विशेष गहन पुनरीक्षण) जैसी प्रक्रियाओं का उद्देश्य रिकॉर्ड और पात्रता की जांच करना होता है, लेकिन इसमें लगने वाला समय कई बार विवाद का कारण बनता है। कोर्ट की टिप्पणी इसी देरी और उसके प्रभाव से जुड़ी थी।
अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित विभाग नागरिकता और पासपोर्ट आवेदन को लेकर क्या कदम उठाते हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी ने नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।



