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विस में सीईटी, कानून-व्यवस्था, बाढ़, मुआवजा और नूंह हिंसा के मुद्दे उठाएंगे: हुड्डा

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि कांग्रेस ने विधानसभा के मानसून सत्र में कानून- व्यवस्था, नूंह हिंसा, बाढ़ से हुए नुकसान और कुशासन जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिए हैं।  हुड्डा ने बुधवार को यहां पार्टी विधायक दल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि पार्टी इसके अलावा सदन में बेरोजगारी, सीईटी पेपर में धांधली, धांधलियां, सरस्वती नदी की खुदाई, दलितों पर बढ़ते अत्याचार, बाजरे की फसल का नुकसान, बाढ़ मुआवजा, परिवार पहचान पत्र की परेशानियां, कर्मचारियों और क्लर्कों के वेतनमान, शिक्षा की चिंताजनक स्थिति, प्रॉपर्टी आईडी में धांधली, सहकारी ऋण और खाद्य बिक्री, आयुष्मान योजना की धांधलियों, किसान बीमा धांधलियां , शामलात और जूमला मालकान आदि जमीन को पंचायतों के नाम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिए गए हैं।

इसके अलावा पार्टी के विधायक अपने क्षेत्र के जुड़े मुद्दों पर सरकार से सवाल-जवाब करेंगे। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी उदयभान भी उनके साथ थे। नूंह हिंसा और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल पर उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सब कुछ पहले से पता होते हुए भी सरकार ने सही वक्त पर उचित कदम क्यों नहीं उठाए? आखिर सरकार पूरे मामले की न्यायिक जांच से क्यों भाग रही है?

उदयभान ने कहा कि सीआईडी द्वारा सरकार को पहले से ही सूचित कर दिया गया था कि इलाके में कई दिनों से तनाव बना हुआ है। शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयानबाजी की जा रही है। लेकिन, हैरानी की बात है कि बावजूद इसके यात्रा वाले दिन मौके के पुलिस अधीक्षक कथित तौर पर छुट्टी पर भेज दिए गए। हुड्डा ने दावा किया कि सरकार की प्रत्येक योजना में घोटाले सामने आ रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना में घोटाले का खुलासा खुद कैग ने किया है। इसमें बताया गया है कि हरियाणा में मरे हुए लोगों का इलाज करने के नाम पर भी भारी भरकम ‘क्लेम’ लिया गया।

उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले 405 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च ही नहीं कर पाई। 1,30,879 मकान के अनुदान को सरकार ने सरेंडर कर दिया। वहीं बीएलसी के तहत केंद्र सरकार द्वारा 47,116 मकान के लिए जो फंड जारी किया गया था, उसमें से सिर्फ 4459 मकान ही बनकर तैयार हो पाए हैं। जाहिर है कि सरकार द्वारा 2022 तक हर सिर पर छत देने का वादा खोखला साबित हुआ। खुद की योजनाओं को सिरे चढ़ाना तो दूर मौजूदा सरकार ने कांग्रेस कार्यकाल के दौरान गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई सौ-सौ गज के प्लॉट आवंटन और मकान बनाने की योजनाओं को भी बंद कर दिया।

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