
समुद्र में चलने वाले जहाज और टैंकर कार या बाइक की तरह ब्रेक लगाकर नहीं रुकते। जब जहाज को रोकना होता है, तो उसका मुख्य इंजन धीरे-धीरे कम किया जाता है और जरूरत पड़ने पर रिवर्स मोड में चलाया जाता है, जिससे गति घटती है। पूरी तरह रुकने के बाद आमतौर पर मुख्य इंजन बंद कर दिया जाता है, लेकिन बिजली और अन्य सिस्टम चलाने के लिए सहायक इंजन चालू रहते हैं। जहाज को एक जगह स्थिर रखने के लिए एंकर (लंगर) समुद्र में डाला जाता है, जो समुद्र की सतह में फंसकर जहाज को बहने से रोकता है। बंदरगाह पर जहाज को रस्सियों से बांधकर स्थिर किया जाता है। इस तरह जहाज बिना पारंपरिक ब्रेक सिस्टम के ही सुरक्षित रूप से रुकते और खड़े रहते हैं।
इसके अलावा, बड़े जहाजों में पोजिशन बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसे “डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम” कहा जाता है। इस सिस्टम में जहाज के छोटे-छोटे थ्रस्टर (प्रोपेलर) अपने आप चालू-बंद होकर जहाज को एक ही जगह स्थिर रखते हैं, खासकर तब जब एंकर डालना संभव न हो, जैसे गहरे समुद्र में।
सुरक्षा के लिहाज से जहाजों को रोकने की पूरी प्रक्रिया पहले से प्लान की जाती है, क्योंकि उनका वजन बहुत ज्यादा होता है और उन्हें अचानक रोकना संभव नहीं होता। इसलिए कप्तान और क्रू समय रहते गति कम करते हैं और सही जगह पर एंकर डालते हैं। यही वजह है कि समुद्री परिवहन में धैर्य और सटीक गणना बेहद जरूरी होती है, ताकि जहाज सुरक्षित तरीके से रुक सके और किसी दुर्घटना की संभावना न रहे।



