
मौसम और जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो (El Niño) का असर वर्ष 2027 तक बना रह सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस जलवायु पैटर्न के कारण तापमान में वृद्धि, वर्षा चक्र में बदलाव और कृषि उत्पादन पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो के लंबे समय तक सक्रिय रहने से न केवल विकासशील देशों पर बल्कि मजबूत अर्थव्यवस्थाओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा लागत में वृद्धि इसका प्रमुख कारण बन सकते हैं।
कृषि क्षेत्र पर इसका सबसे बड़ा असर देखने को मिलता है, जहां फसलों की पैदावार प्रभावित होने से आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ता है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
भारत जैसे देशों में मानसून पैटर्न पर असर पड़ने की संभावना भी जताई गई है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष:
अल नीनो का संभावित लंबा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। इससे महंगाई और जलवायु असंतुलन दोनों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।



