मक्का से इथेनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी, 717 करोड़ लीटर की रिकॉर्ड सप्लाई से बदल रही ईंधन की तस्वीर

भारत में इथेनॉल उत्पादन का पारंपरिक आधार गन्ना रहा है, लेकिन अब मक्का भी जैव ईंधन के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहा है। मक्का आधारित इथेनॉल मॉडल से किसानों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं और देश के ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिल रही है। हाल के वर्षों में इथेनॉल आपूर्ति में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे पेट्रोल में मिश्रण कार्यक्रम को गति मिली है।
मक्का से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में अनाज से प्राप्त स्टार्च को किण्वन (Fermentation) के जरिए अल्कोहल में बदला जाता है। गन्ने के मुकाबले मक्का एक वैकल्पिक फीडस्टॉक के रूप में महत्वपूर्ण हो रहा है, क्योंकि इसकी उपलब्धता कई क्षेत्रों में बेहतर है और इससे फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल में जैव ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और किसानों की आय के नए स्रोत तैयार करना है। मक्का आधारित इथेनॉल संयंत्रों की बढ़ती संख्या से कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के बीच नया संबंध बन रहा है।
हालांकि, इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ खाद्य सुरक्षा, फसल उपयोग, पानी की उपलब्धता और किसानों के लिए उचित मूल्य जैसे मुद्दों पर संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार टिकाऊ जैव ईंधन मॉडल के लिए उत्पादन, पर्यावरण और कृषि जरूरतों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा।
नोट: इथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति के आंकड़े सरकारी नीतियों, मौसम, फसल उपलब्धता और बाजार परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।



