
भारतीय नौसेना के सर्वे जहाज INS सतलुज ने हाल ही में मॉरिशस के समुद्री क्षेत्र में अपना हाइड्रोग्राफिक सर्वे मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस मिशन के तहत INS सतलुज ने लगभग 35 हजार वर्ग मील समुद्री क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण किया, जो भारत की समुद्री तकनीकी क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य मॉरिशस के तटीय क्षेत्रों और आस-पास के समुद्री इलाकों के जल-गहराई, समुद्र तल की संरचना, नौवहन सुरक्षा और पर्यावरणीय बदलावों का सटीक डेटा एकत्र करना था।
INS सतलुज भारतीय नौसेना के सर्वे वेसल वर्ग का एक अत्याधुनिक जहाज है, जो नवीनतम हाइड्रोग्राफिक उपकरणों, सोनार सिस्टम और जीआईएस मैपिंग तकनीक से सुसज्जित है। इसके माध्यम से समुद्री मानचित्रण (Marine Charting) और नौवहन मार्गों की सुरक्षा को बढ़ाने में सहायता मिलती है। मॉरिशस में इस सर्वे अभियान के दौरान भारतीय नौसेना ने न केवल स्थानीय अधिकारियों के साथ तकनीकी जानकारी साझा की, बल्कि वहां के हाइड्रोग्राफिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया। यह कदम दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) को और मजबूत करता है।
भारत और मॉरिशस के बीच लंबे समय से घनिष्ठ राजनयिक और समुद्री संबंध रहे हैं। INS सतलुज का यह मिशन उस विश्वास और सहयोग का प्रतीक है जो दोनों देशों ने वर्षों से कायम रखा है। इस सर्वे से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग मॉरिशस की नौवहन सुरक्षा, समुद्री संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी नीतियों को और प्रभावी बनाने में किया जाएगा।
भारतीय नौसेना के अनुसार, ऐसे अभियानों से न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति मजबूत होती है, बल्कि यह “सागर नीति (Security and Growth for All in the Region)” के सिद्धांत को भी साकार करती है। INS सतलुज की यह उपलब्धि भारतीय नौसेना की तकनीकी क्षमता, अनुशासन और क्षेत्रीय मित्रता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी।



