
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने स्पष्ट किया है कि भारत में ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती संभव नहीं है।
मंत्री के अनुसार वैश्विक बाजार से खरीदा गया सस्ता कच्चा तेल तुरंत भारतीय रिफाइनरियों और पेट्रोल पंपों तक नहीं पहुंचता। तेल को समुद्री मार्ग से भारत लाने, उसका प्रसंस्करण करने और वितरण में समय लगता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर घरेलू बाजार में कुछ समय बाद दिखाई देता है।
हाल के दिनों में ब्रेंट और WTI कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और कई रिपोर्टों में यह बताया गया है कि तेल $80 प्रति बैरल से नीचे आ गया है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियों ने अभी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कच्चे तेल की कीमत ही पेट्रोल-डीजल के दाम तय नहीं करती। इसमें परिवहन लागत, रिफाइनिंग खर्च, टैक्स, विनिमय दर और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति जैसे कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार तेल कंपनियां अभी भी कुछ स्तर पर लागत के दबाव का सामना कर रही हैं।
हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो भविष्य में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। कुछ बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि स्थिर गिरावट की स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की संभावना बन सकती है।
फिलहाल केंद्रीय मंत्री का संकेत यही है कि कच्चे तेल की हालिया गिरावट का लाभ तुरंत नहीं मिलेगा, लेकिन यदि यह रुझान कायम रहता है तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दामों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।



