
NCERT की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन और कथित कंटेंट विवाद के कारण तीनों प्रोफेसरों को ब्लैकलिस्ट किया गया था। विरोध स्वरूप ये प्रोफेसर अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं और उन्होंने अपने पक्ष में तर्क पेश किए हैं।
प्रोफेसरों का दावा है कि उनका काम शैक्षणिक स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है और उन्हें ब्लैकलिस्ट करना संविधान के अधिकारों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए शिक्षा मंत्रालय और NCERT से जवाब तलब किया है।
इस विवाद ने शिक्षा और शैक्षणिक सामग्री पर राजनीति और सेंसरशिप के मुद्दों को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का निर्णय भविष्य में पाठ्यपुस्तकों में संशोधन और शैक्षणिक स्वतंत्रता के लिए मिसाल बन सकता है।



