‘लोग देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन…’, एअर इंडिया हादसे के इकलौते जीवित बचे यात्री का छलका दर्द

एअर इंडिया विमान हादसे में जीवित बचे एकमात्र यात्री ने पहली बार अपने अनुभव और मानसिक संघर्ष को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि वह दुर्घटना में बच गए, लेकिन हादसे के बाद उनके भीतर चल रहे दर्द, सदमे और भावनात्मक संघर्ष को कम ही लोग समझ पाते हैं।
सर्वाइवर ने बताया कि दुर्घटना की यादें अब भी उनका पीछा करती हैं। हादसे में खोए लोगों की तस्वीरें, घटनास्थल के दृश्य और भयावह पल उनके मन में बार-बार लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से ठीक होना एक अलग बात है, लेकिन मानसिक रूप से उस त्रासदी से उबरना कहीं अधिक कठिन है।
उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें लगातार लोगों के सवालों, मीडिया की रुचि और सार्वजनिक ध्यान का सामना करना पड़ा। हालांकि वह जीवित बचने के लिए खुद को भाग्यशाली मानते हैं, लेकिन हादसे में जान गंवाने वालों और उनके परिवारों की पीड़ा उन्हें आज भी झकझोरती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बड़े हादसों से बचे लोगों को अक्सर पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस, चिंता और भावनात्मक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में मनोवैज्ञानिक सहायता और परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सर्वाइवर की यह भावुक प्रतिक्रिया केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन मानसिक चुनौतियों की भी याद दिलाती है, जिनसे किसी बड़ी त्रासदी के बाद जीवित बचे लोग लंबे समय तक गुजरते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग केवल उनके बच जाने की कहानी नहीं, बल्कि हादसे से जुड़ी मानवीय पीड़ा को भी समझेंगे।



