


देश में ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेल कंपनियों का कुल घाटा करीब ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Crude Oil की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन पर दबाव ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। इसके चलते कई तेल विपणन कंपनियां लगातार वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती है, तो इसका सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकारी नीति और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।