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राष्ट्रपति ने किया आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन का उद्घाटन

उज्जैन। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द मध्य प्रदेश के तीन दिवसीय प्रवास के तीसरे दिन रविवार सुबह उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने कालिदास अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल में होने वाले अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल मंगुभाई पटेल मौजूद रहे।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उज्जैन ऐसा शहर है, जिसका प्राचीन इतिहास है। मेरी भी इससे अनेक स्मृतियां जुड़ी हैं। कई साल पहले काफी लंबे समय तक मैं यहां रहा। यहां की गलियों से मैं वाकिफ हूं। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और उनमें प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आज भी आयुर्वेद है।

समारोह में केन्द्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल का संदेश भी प्रसारित किया गया। समारोह में आयुर्वेद विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति कोविन्द ने शासकीय धनवंतरि आयुर्वेद कॉलेज का वर्चुअल लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेंगे और यहां भगवान महाकाल के दर्शन कर पूजन-अर्चन करेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योग में आसन, प्राणायाम का अपना महत्व है। कोविड के दौरान हमने तय मध्य प्रदेश के एक करोड़ घरों में काढ़ा पहुंचाया, उस समय हमने योग से निरोग अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि जड़ से लेकर फूल, फल, पत्तियां औषधियों से भरी हैं। भारतीय पद्धति से बेहतर कोई चिकित्सा पद्धति नहीं है। प्राचीन उपचार की पद्धतियों में शोध, अनुसंधान होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश प्राचीन और महान राष्ट्र है। हजारों साल पुराना ज्ञात इतिहास है हमारा। मेरी मान्यता है कि एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति जिसमें रोग हो ही न, अगर कोई है तो इसकी शुरुआत योग से होती है। उन्होंने कहा कि महाकाल महाराज की पवित्र धरती है उज्जैन। यह ज्ञान, भक्ति और कर्म की भूमि है। यह अद्भुत भूमि है। जहां अनादिकाल से लोकसेवा को प्रेरणा मिलती रही है। हम सभी का सौभाग्य है कि राष्ट्रपति यहां हैं। आयुर्वेद के मामले में रिसर्च का एक बेहतर सेंटर कैसे प्रारंभ किया जा सकता है यदि आप इसका मार्गदर्शन करेंगे तो हम इसे कुशलता से करेंगे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दुनिया में प्लास्टिक सर्जरी करने की पद्धति महर्षि सुश्रुत की खोज है। भारत ने जिस प्रकार प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के सहारे कोविड-19 की लड़ाई को आगे बढ़ाया वह भी महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद का विकास भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ आशा का केंद्र है।

उन्होंने कहा कि नीम के पेड़ की छाल से पेट का दर्द, खांसी के लिए अदरक ऐसी अनेक आयर्वुेद पद्धतियां हैं। जनजातीय क्षेत्र में सिकल सेल रोग है। ये अभी तक गया नहीं है। आयुर्वेद, होम्योपैथी के जरिए भी हमें सिकल सेल के इलाज में सफलता मिलेगी। जरूरत है इसे अनुसंधानात्मक प्रामाणिकता प्रदान की जाए। आज भी कई आयुर्वेदाचार्य अत्यंत प्रभावकारी फॉमूर्ले का निर्माण करते हैं। इसका प्रसार किया जाना चाहिए। हमारे जनजातीय वर्ग के पास जड़ी बूटियों का अद्भुत खजाना है।

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