SIR पर चिदंबरम का दावा, 10 करोड़ वोटिंग अधिकार से होंगे वंचित

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया के चलते देश की करीब 10 प्रतिशत वयस्क आबादी यानी लगभग 10 करोड़ लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर नागरिकों के लिए एक नई ‘नॉन-वोटिंग सिटिजन’ श्रेणी तैयार करने का आरोप लगाया। यह चिदंबरम का दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
चिदंबरम की यह टिप्पणी पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आए अनुभव के बाद आई। सूरी ने बताया कि 2003 की मतदाता सूची से उनके विवरण का मिलान नहीं होने के बाद उनसे भारतीय नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज मांगे गए। उन्होंने कहा कि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद यदि उन्हें ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों के लिए स्थिति कैसी होगी।
इस मुद्दे ने मतदाता सत्यापन, दस्तावेजों की जरूरत और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखने को लेकर बहस बढ़ा दी है। दूसरी ओर, पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को नोटिस दिया जा रहा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है और उन्हें आवश्यक दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल रहते हैं और कितने नाम हटाए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप माना है।



