NEET-PG सीट नियमों पर राज्यों की अलग राय, SC के फैसले पर सवाल

NEET-PG मेडिकल दाखिले में सीटों के नियमों को लेकर राज्यों के बीच मतभेद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साल से अधिक समय पहले कहा था कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल दाखिले में राज्य का डोमिसाइल या निवास स्थान अपने आप में सीट आवंटन का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके बावजूद कई राज्यों में अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं।
राज्यों के अलग-अलग रुख का सीधा असर NEET-PG अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है। एक ही राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के बाद छात्रों को अलग-अलग राज्यों की काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया के नियमों को समझना पड़ रहा है। इससे मेडिकल सीटों को लेकर भ्रम और असमान अवसर की स्थिति पैदा होने की चिंता जताई जा रही है।
मामले में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार NMC राज्यों के साथ समन्वय कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप प्रक्रिया सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, राज्यों का तर्क है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियम बना रहे हैं।
NEET-PG में सीटों का बंटवारा और राज्य कोटा पहले से ही छात्रों के लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है। ऐसे में नियमों में एकरूपता नहीं होने पर दूसरे राज्यों में दाखिला लेने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि केंद्र, NMC और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए किस तरह एक समान व्यवस्था तैयार करती हैं। छात्रों के लिए स्पष्ट और समान नियम तय होना इस विवाद को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



