Supreme Court: पुराने मामलों पर CJI सूर्यकांत ने बताया फैसला कैसे होता है

सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत की कार्यप्रणाली और नई पहल के बारे में जानकारी दी है। पुराने मामलों को प्राथमिकता देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार समर्पित पीठों के गठन का फैसला किया है, जो सबसे पुराने लंबित मामलों की सुनवाई पर विशेष ध्यान देंगी।
CJI सूर्यकांत के नेतृत्व में अदालत लंबित मामलों को कम करने के लिए केवल नियमित सुनवाई पर निर्भर नहीं है, बल्कि मध्यस्थता और आपसी समझौते जैसे वैकल्पिक तरीकों को भी बढ़ावा दे रही है। उनका जोर इस बात पर है कि जिन विवादों का समाधान दोनों पक्षों की सहमति से संभव है, उन्हें लंबी अदालती प्रक्रिया में खींचने के बजाय समझौते के जरिए समाप्त किया जाए।
इसी सोच के तहत ‘समाधान समारोह 2026’ की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट में लंबित ऐसे मामलों की पहचान की गई है, जिनमें मध्यस्थता, सुलह या लोक अदालत के माध्यम से समाधान संभव है। विशेष लोक अदालत का आयोजन 21 से 23 अगस्त 2026 तक किया जा रहा है।
इस पहल के तहत करीब 36,000 मामलों की पहचान की गई है। इनमें बड़ी संख्या में निजी पक्षों के बीच के विवाद शामिल हैं, जबकि अन्य मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा विभिन्न संस्थाओं से जुड़े पक्ष शामिल हैं।
CJI सूर्यकांत ने लंबित मामलों को कम करने में बार और बेंच के सहयोग तथा मध्यस्थता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। अदालत का प्रयास है कि न्याय केवल फैसला सुनाने तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों को जल्द, प्रभावी और व्यावहारिक समाधान भी मिले।
मुख्य बातें:
- पुराने मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट में चार समर्पित पीठें बनाई गई हैं।
- समझौते योग्य मामलों में मध्यस्थता और लोक अदालत पर जोर।
- समाधान समारोह 2026 के तहत हजारों मामलों की पहचान।
- विशेष लोक अदालत 21-23 अगस्त को आयोजित हो रही है।
- CJI सूर्यकांत ने बार और बेंच के सहयोग को अहम बताया।
- लक्ष्य लंबित मामलों को कम कर लोगों को जल्द न्याय उपलब्ध कराना है।



